इतिहास


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महान शक्तिस्थल

पंजाब प्रदेश के पायल नगर में स्थित प्राचीन महादेव मंदिर एक महान शक्ति स्थल है। करीब 5500 वर्ष पुराने इस मंदिर का अपना ही एक अलग महत्व और इतिहास है यह मंदिर शायद एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसे बाबर जैसा आक्रमक शासक भी इस शक्ति पीठ को पूर्णतया नष्ट नहीं कर सका जब बाबर ने इस शिवलिंग को खंडित करने का प्रयत्न किया तो इसका ऊपरी भाग खंडित होते ही उसके ऊपरी भाग से रक्त प्रवाहित होने लगा यह देख कर बाबर डर गए और उन्होंने इस प्राकृतिक स्वयंभू शिवलिंग को और खंडित करने के बजाये उसके इर्दगिर्द मंदिर नुमा निर्माण कर दिया और जब इसको बदलने लगे तो इसमें से आवाज़ आयी की यह खंडित ही पूजा जायेगा तब से इस खंडित शिवलिंग की ही पूजा की जाती है। यह घटना इस स्थान के शक्ति स्थल होने का प्रमाण है शक्ति स्थल से हमारा तात्पर्य भूमि के विशेष खंड से है ऐसी ऊष्मा से भरे खंड को दिव्य दृष्टि वाले सतजन अपनी तपोभूमि, कर्मभूमि, निर्वाण भूमि के रूप में अपना लेते हैं ,ऐसे स्थान धार्मिक उपलब्धियों के लिए उचित होता है संतो के स्पर्श से ऐसे स्थानों की ऊर्जा और प्रचंड हो जाती है इस मंदिर में और भी अनेक रोचक रहस्य है यहाँ सच्चे मन से आने वाले हर श्रद्धालु की मुराद पूरी होती है यहाँ महामृत्युंजय का जाप कराने से हर संकट का निवारण हो जाता है।


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पवित्र सरोवर

मंदिर के प्रांगण में ही पवित्र सरोवर स्थित है जिसके बारे में कहा जाता है की इसका निर्माण पांडवों ने अपने वनवास काल के दौरान करवाया था और इस शिवलिंग की पूजा भी की। पूजा करके भगवन शिव से विजय श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।


तप स्थली

इस मंदिर में 9 साधुओं ने तप साधना करते हुए जिन्दा समाधियां भी ली हुई हैं। उत्तर भारत में काशी के बाद यह एक ही शिव मंदिर है जहाँ नौ महपुरुषों ने जीवित समाधी लेकर निर्वाण प्राप्त किया था । इन इच्छामुक्त साधुओं के अतिरिक्त यहाँ पर दो दर्जन के करीब और महापुरुषों की समाधियों भी हैं जिन्होंने यहाँ निर्वाण प्राप्त



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